Thursday, 28 January 2016

You are my Lifeline

Imprint the humble kisses of my exquisite lips, for your whole day shine,
Absorb the warm hugs of my body in yours, to feel warmth like red wine.

My gentle smile to inspire you and to keep you beaming always and fine,
To brighten your blissful day, I like to surrender this enlightened soul of mine.
 
Inhale the breaths of my life to make yourself more lively and feeling divine,
Our meeting  is like quenching of longing thirst, meet me lifelong on dine.

Its a heavenly feeling being with you, it gives sense to me, as you are my lifeline,
I accomplish all my treasures being with you, as you are my delight and goldmine.

Love and craving for boundless togetherness, takes us on cloud nine,
Let us forget all worldly customs, beyond the border of acceptance or decline.









Monday, 11 January 2016

मैं ज़िंदा हुँ




करने दो मुझे शोर के मैं ज़िंदा हुँ, पुकारू रोशनियाँ पिघलाने को अंधेरा 


कुछ औरके मैं ज़िंदा हुँ।

मामूली सही पर एक हसती है मेरी, कराने दो अपने वजूद का अहसास मुझे,

 के मैं ज़िंदा हुँ।

दुनियादारी कब समझ आई है जो अब समझ सकू, छोड़ दो मुझे मेरे हाल पर, के

मैं ज़िंदा हुँ,

इन दिखावे की महफ़िलो से दूर कहीं, रहने दो मुझे मेरे दोस्तों के साथ, के मैं ज़िंदा

हुँ।

घूँट-घूँट बहुत पी लिया संजीदगी का ज़हर, मुझ को भी रहने दो लापरवाही, के

मैं ज़िंदा हुँ,

पत्थर बना दिया ख़ुद के अहसासों को ख़ुद में दफ़्न कर करके, ज़िदगी है बाकि अभी

के मैं ज़िंदा हुँ।


जिसे किसी ने अपना बना कर छला हो, वो ग़ैरो से क्या कहे, आज करने दो गिला, के

 मैं ज़िंदा हुँ,

मुझे वक़्त ने मात दी, जो दौड़ा बेतहाशा, कह दो चले कभी मेरी चाल भी, के मैं ज़िंदा

हुँ।


पेशानी पर लिख दो, के ज़िंदा लोगों में है शुमारी मेरी, ख़ामोश रह कर कह ना सका,

के मैं ज़िंदा हुँ,

ज़र्रा ज़र्रा दर्द से चीख़ उठेगा ग़र कह दी दस्तान-ए-सफ़र मैंने, भीड़ के क़ब्रिस्तान मे 
सही, पर मैं ज़िंदा हुँ।